Sunday, 29 March 2015

Joke :-)

बहोत खतरनाक जोक...... जरुर पढे
आज विद्यालय में बहुत चहल पहल है

.
सब कुछ साफ - सुथरा , एक दम
सलीके से ।
.
सुना है निरीक्षण को कोई
साहब आने वाले हैं

.
पूरा विद्यालय चकाचक ।
.
नियत समय पर साहब विद्यालय
पहुंचे ।
.
ठिगना कद , रौबदार चेहरा , और
आँखें तो जैसे
जीते जी पोस्टमार्टम कर दें ।
.
पूरे परिसर के निरीक्षण के बाद
उनहोंने
कक्षाओं का रुख किया ।
.
कक्षा पांच के एक
विद्यार्थी को उठा कर
पूछा , बताओ देश का प्रधान
मंत्री कौन है ?
.
बच्चा बोला -जी राम लाल ।
.
साहब बोले -बेटा प्रधान मंत्री ?
.
बच्चा - रामलाल ।
.
अब साहब गुस्साए - अबे तुझे पांच
में किसने
पहुंचाया ? पता है मैं तेरा नाम
काट
सकता हूँ ।
.
बच्चा -
कैसे काटोगे ?
मेरा तो नाम ही नहीं लिखा है

मैं तो बाहर बकरी चरा रहा था ।
इस मास्टर ने कहा कक्षा में बैठ
जा दस रूपये
मिलेंगे ।
.
तू तो ये बता रूपये तू
देगा या मास्टर ?
.
.
साहब भुनभुनाते हुवे मास्टर
जी के पास गए ,
कडक आवाज में पूछा -
क्या मजाक बना रखा है ।
फर्जी बच्चे बैठा रखे हैं ।
पता है मैं तुम्हे नौकरी से बर्खास्त
कर सकता हूँ

.
.
गुरूजी -
कर दे भाई ।
मैं कौन सा यहाँ का मास्टर हूँ ।
मास्टर
तो मेरा पड़ोसी दुकानदार है ।
वो दुकान का सामान लेने शहर
गया है।
कह रहा था एक खूसट साहब
आएगा , झेल लेना ।
.
अब तो साहब का गुस्सा सातवें
आसमान पर ।
पैर पटकते हुए प्रधानाध्यापक के
सामने जा पहुंचे

चिल्लाकर बोले ,
" क्या अंधेरगर्दी है
, शरम नहीं आती ।
क्या इसी के लिए तुम्हारे स्कूल
को सरकारी इमदाद मिलती है

पता है ,मैं तुम्हारे स्कूल
की मान्यता समाप्त
कर सकता हूँ
जवाब दो प्रिंसिपल साहब ।
.
प्रिंसिपल ने दराज से एक
सौ की गड्डी निकाल कर मेज
पर रखी और
बोला -
मैं कौन सा प्रिंसिपल हूँ
प्रिंसिपल तो मेरे चाचा हैं ।
प्रॉपर्टी डीलिंग भी करते हैं
आज एक सौदे का बयाना लेने
शहर गए हैं ।
कह रहे थे ,
एक कमबख्त निरीक्षण
को आएगा , उसके मुंह पे ये
गड्डी मारना और दफा करना ।
.
.
.
.
.
.
.
.
.
साहब ने मुस्कराते हुए गड्डी जेब के
हवाले
की और बोले - आज बच गये तुम सब ।
अगर आज
मामाजी को सड़क के ठेके के
चक्कर में शहर
ना जाना होता , और
अपनी जगह वो मुझे
ना भेजते तो तुम में से एक
की भी नौकरी ना बचती ।
मेरा भारत महान

golgapppa Cart Hath Thela











Capt Shekhar Gupta
CEO
www.Golgapppa.com
301 Royal Regency
Near Reliance Fresh, Opp Axis Bank
Airport Road Indore 452005 MP 
T - [0731] 6452650 / 4044650 / 6450535
F: 91-731-4044650
M : 91 9329737330
098 26 00 88 99
Visit us: www.golgapppa.com
www.golgapppacom.blogspot.com
E : shekhar@golgapppa.com


http://a-world-of-aviation.blogspot.in/2015/01/bank-account-details.html



State Bank of India









AC Name:  Capt Chandra Shekhar Gupta
AC NO : 0063004478123
RTGS / NEFT : SBIN0030418



AXIS BANK









AC Name: Capt Chandra Shekhar Gupta
AC NO : 914010022221732
RTGS / NEFT :  UTIB0001681
Swift Code :  AXISINBB043

Pilot Sucide

1982 से लेकर आज तक एयरक्राफ्ट की मदद से आत्महत्या करके कमर्शल पायलट्स ने 421 लोगों की जान ली है । अगर 24 मार्च को क्रैश हुई जर्मनविंग्स फ्लाइट के मामले में भी को-पालयट के आत्महत्या करने की पुष्टि होती है, तो यह संख्या बढ़कर 571 हो जाएगी।

यूएस एविएशन रेग्युलेटर की तरफ से पिछले साल जारी हुई रिपोर्ट में साफ हुआ था कि अब 2003 से लेकर 2012 तक अमेरिका में इस तरह के 8 मामले सामने आए हैं। इनमें से 7 मामलों में पायलट अकेले ही सवार थे। इनमें से 4 पायलट शराब के नशे में धुत्त थे और 2 डिप्रेशन कम करने वाली दवाएं ले रहे थे।

इन चौंकाने वाले मामलों के बावजूद हवाई यात्रा करना यातायात के बाकी साधनों के मुकाबले बहुत ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि क्रैश की घटनाएं बहुत कम होती हैं।

क्या जर्मनविंग्स जैसा क्रैश भारत में भी हो सकता था? एविएशन एक्सपर्ट इसका जवाब हां में देते हैं, मगर यह भी कहते हैं कि ऐसा आसान नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि 9/11 के बाद दुनियाभर के एयरक्राफ्ट्स में कॉकपिट में दरवाजे जरूरी कर दिए गए हैं। फ्लाइट के दौरान ये हमेशा बंद रहते हैं और इन्हें अंदर से ही खोला जा सकता है। भारत में पहले से नियम है कि कॉकपिट के अंदर हमेशा कम से कम 2 लोग होने चाहिए।

एक एयरलाइन कमांडर ने कहा, 'जब पायलट को बाथरूम जाना होता है, फ्लाइट अटेंडेंट्स को कॉकपिट में बुलाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि कॉकपिट के अंदर मौजूद दूसरे पायलट को कुछ होने पर वह दरवाजा खोल सके। मगर इस नियम का पालन ज्यादा गंभीरता से नहीं किया जाता है। जर्मनविंग्स वाली घटना के बाद डीजीसीए इसे जरूरी कर सकता है।' एक अन्य कमांडर ने कहा, 'भारत के साथ समस्या यह है कि एयरलाइन्स में ईमानदारी की संस्कृति नहीं है। ऐसे में मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोग कभी इस बारे में नहीं बताएंगे।'

साइकायट्रिस्ट डॉक्टर हरीश शेट्टी ने कहा, 'पायलट्स के लिए रैंडम यूरिन और ब्लड टेस्ट जरूरी किए जाने चाहिए। साइकोट्रॉपिक और अडिक्टिव ड्रग्स के लिए भी टेस्ट किए जाने चाहिए।' उन्होंने कहा कि एयरलाइन्स को पायलट्स की मेंटल हेल्थ और लाइफस्टाइल पर भी नजर रखनी चाहिए। डॉक्टर शेट्टी ने कहा कि पायलट्स के लिए मेंटल हेल्थ ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर किसी बड़ी मानसिक बीमारी के संकेत मिलते हैं या कोई और सबूत मिलता है, तो उस पायलट को तुरंत फ्लाइट उड़ाने से रोक देना चाहिए।

भारत में कमर्शल पायलट का लाइसेंस रखने वाले इंडियन एयर फोर्स पायलट्स द्वारा किए जाने वाले मेडिकल टेस्ट को क्लियर कर लेते हैं। इसमें पायलट्स की फिजिकल फिटनेस ही चेक की जाती है, मेंटल फिटनस को चेक नहीं किया जाता। एयरलाइन को इसका पता तभी चलता है, जब कोई खुद से कोई उसे जानकारी देता है।

Gas Subsidy

ताजा खबर ; प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने देश से अपील की, कि जिन लोगो को गैस सब्सिडी की जरूरत नहीं हे वो स्वेच्छा से गैस सब्सिडी वापस करे......"प्रधानमन्त्री जी पहले आप और आपके सांसद पार्लियामेंट केन्टीन में मिल रही सब्सिडी को छोड़ो और यदि हिम्मत और होसला हे तो पहल करो की जिस तरह JAN 2004 के बाद के केंद्रीय कर्मचारियों को पेंशन नहीं हे उसी तरह देश हित में कोई भी MP और MLA को पेशन नही मिलेगी.... शुरुआत अपने से तो कीजिये फिर देखिये देश की जनता भी अपना योगदान कितना देती है !!

मित्रो इसे इतना पोस्ट करो दोस्तों कि ये मेसेज PM तक पँहुच जाये

Eat Chicken

अगली बार मुर्गे के लेग पीस का लुत्फ उठाते वक्त सोचें कि कहीं यह आपको ऐंटिबायॉटिक्स प्रतिरोधी तो नहीं बना रहा। अमेरिकन रिसर्चर्स ने ताजा स्टडी में पाया है कि 2030 तक भारत के लोग हर साल स्ट्रॉन्ग ऐंटिबायॉटिक दवाएं खिलाकर तैयार किया गया 4,743 टन चिकन खा रहे होंगे।

'प्रसीडिंग्स ऑफ द नैशनल अकैडमी ऑफ साइंसेस' जर्नल में छपी स्टडी में कहा गया है कि भारत ने साल 2010 में ऐंटिबायॉटिक्स वाला 2,066 टन चिकन इस्तेमाल किया। इस हिसाब से देखा जाए तो 2030 तक भारत ऐसा चिकन इस्तेमाल करने वाला दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। चीन इस लिस्ट में नंबर वन होगा।

पिछले साल सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वायरनमेंट ने दिल्ली और एनसीआर से लिए 40 फीसदी चिकन सैंपल्स में ऐंटिबायॉटिक्स पाए थे। खाने के लिए कमर्शली पैदा किए गए मुर्गे-मुर्गियों को ऐंटिबायॉटिक्स दिए जाते हैं। इन्हें जानवरों के लिए तैयार ऐंटिबायॉटिक्स भी दिए जाते हैं और इंसानों वाले भी। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि वे बीमारियों से बचे रहें और तेजी से बड़े हों।

जब इस तरह से तैयार मुर्गे खाए जाते हैं, तो ऐंटिबायॉटिक के अंश इंसानों भी चले जाते हैं। इससे धीरे-धीरे इंसान का शरीर उन ऐंटिबायॉटिक्स के लिए भी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर देता है। इससे होता यह है कि किसी बीमारी के इलाज के लिए जब डॉक्टर आपको वह ऐंटिबायॉटिक्स देते हैं, वे काम नहीं करते।

कंज्यूमर राइट्स ऐक्टिविस्ट्स का कहना है कि समस्या गंभीर हो रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के आंकड़ों के मुताबिक साल 2013 में भारत में 58 हजार लोगों की मौत ऐंटिबायॉटिक्स रेजिस्टेंट होने की वजह से हुई। इस हिसाब से देखें तो 2050 में 20 लाख में से एक मौत की वजह यही होगी।

साउथ कोरिया और यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों ने इस तरह के चिकन पर बैन लगा दिया है। हाल ही में मैडॉनल्ड ने भी ऐलान किया था कि वह इस तरह के ऐंटिबायॉटिक देकर तैयार किया गए गए चिकन सर्व करना बंद कर देगा।